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Coconut oil hindi

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अभी तक हुए 1500 से अधिक शोधों से यह साबित होता है कि नारियल तेल (कोकोस न्युसिफेरा) हमारी धरा पर विद्यमान एक स्वास्थ्यप्रद और उत्कृष्ट तेल है। सेहत से लेकर सुंदरता तक नारियल तेल प्रकृति का नायाब और अनमोल उपहार है। इसके करिश्माई फायदे आपको चौंका देंगे। गर्म करने पर यह खराब नहीं होता। इसकी शैल्फ लाइफ दो वर्ष से अधिक है। हमें अनरिफाइंड, अनहीटेड, ऑर्गेनिक, कॉल्ड-प्रेस्ड और एक्स्ट्रावर्जिन तेल प्रयोग में लेना चाहिए।
विश्वविख्यात फैट और ऑयल्स एक्सपर्ट और जर्मनी के फेडरल इंस्टिट्यूट ऑफ फैट्स रिसर्च की चीफ एक्सपर्ट डॉ जॉहाना बडविग ने साबित किया है कि नारियल तेल फ्राइंग और डीप फ्राइंग के लिए सबसे अच्छा विकल्प है। गर्म करने पर इसमें ट्रांसफैट नहीं बनते। कैंसर के रोगी भी इस तेल को प्रयोग कर सकते हैं।
पौराणिक महत्व
हिंदू धर्म में नारियल एक शुद्ध, सात्विक, पवित्र, फलदायी एवं लक्ष्मी माता से मनुष्य को जोड़ने वाला फल है, इसीलिए इसे संस्कृत में श्रीफल कहते हैं, श्री का अर्थ होता है लक्ष्मी। किसी भी धार्मिक एवं शुभ कार्य में हुई पूजा में नारियल रखने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है। घर में नारियल रखने से घर के वास्तु दोष दूर होते हैं। मंदिरों में आमतौर पर इसे पूजा के दौरान भगवान की मूर्ति के सामने फोड़ा जाता है। फोड़ने के बाद यह नारियल प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है।

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Coconut oil hindi

  1. 1. 1 ना�रयल तेल एक िडज़ाइनर फै ट अभी तक ह�ए 1500 से अिधक शोधों से यह सािबत होता है िक ना�रयल तेल (कोकोस न्युिसफे रा) हमारी धरा पर िवद्यमान एक स्वास्थ्यप्रद और उत्कृ � तेल है। सेहत से लेकर सुंदरता तक ना�रयल तेल प्रकृ ित का नायाब और अनमोल उपहार है। इसके क�रश्माई फायदे आपको चौंका देंगे। गमर् करने पर यह खराब नहीं होता। इसक� शैल्फ लाइफ दो वषर् से अिधक है। हमें अन�रफाइंड, अनहीटेड, ऑग�िनक, कॉल्ड-प्रेस्ड और एक्स्ट्राविजर्न तेल प्रयोग में लेना चािहए। िव�िवख्यात फै ट और ऑयल्स एक्सपटर् और जमर्नी के फे डरल इंिस्टट्यूट ऑफ फै ट्स �रसचर् क� चीफ एक्सपटर् डॉ जॉहाना बडिवग ने सािबत िकया है िक ना�रयल तेल फ्राइंग और डीप फ्राइंग के िलए सबसे अच्छा िवकल्प है। गमर् करने पर इसमें ट्रांसफै ट नहीं बनते। कैं सर के रोगी भी इस तेल को प्रयोग कर सकते हैं। पौरािणक महत्व िहंदू धमर् में ना�रयल एक शुद्ध, साित्वक, पिवत्र, फलदायी एवं ल�मी माता से मनुष्य को जोड़ने वाला फल है, इसीिलए इसे संस्कृ त में श्रीफल कहते हैं, श्री का अथर् होता है ल�मी। िकसी भी धािमर्क एवं शुभ कायर् में ह�ई पूजा में ना�रयल रखने से सभी कायर् िसद्ध होते हैं और ल�मी क� िवशेष कृ पा बनी रहती है। घर में ना�रयल रखने से घर के वास्तु दोष दूर होते हैं। मंिदरों में आमतौर पर इसे पूजा के दौरान भगवान क� मूितर् के सामने फोड़ा जाता है। फोड़ने के बाद यह ना�रयल प्रसाद के �प में भ�ों में बांटा जाता है।
  2. 2. 2 िनराला फल अनूठे फै ट्स बह�राष्ट्रीय संस्थान और एफ.डी.ए. हमेशा से सेचुरेटेड फै ट्स को �दयघाती और कॉलेस्टेरोल बढ़ाने के िलए िजम्मेदार मानते रहे िफर भी आज सेचुरेटेड फै ट्स से भरपूर ना�रयल तेल स्वास्थ्यप्रद तेलों क� कतार में बह�त आगे खड़ा है। ना�रयल तेल – MCFAs का सव��म �ोत फै ट्स और तेल फै टी एिसड्स के अणुओंसे बनते हैं। इनका वग�करण काबर्न के सेचुरेशन या काबर्न चेन क� लंबाई के आधार पर िकया जाता है। मोनोअनसेचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फै ट्स पहले वग�करण के उदाहरण हैं। दूसरा वग�करण काबर्न चेन क� लंबाई के आधार पर होता है। ये तीन तरह के होते हैं। हमारे अिधकांश तेल लांग चेन फै टी एिसड्स (LCFA) क� श्रेणी में आते हैं। कु छ शॉटर् लेन फै टी एिसड्स (SCFA) होते हैं, जो हमारी कोलोन में बनते हैं और बह�त बड़े काम करते हैं। ना�रयल तेल में मध्यम लंबाई के नन्हें मीिडयम चेन फै टी एिसड्स (MCFA) होते हैं। ये मीिडयम चेन फै टी एिसड्स ही ना�रयल तेल को िनराला और अनूठा बनाते हैं। इन िडज़ाइनर फै ट्स का मेटाबोिलज्म और काम करने का तौर-तरीका लांग चेन फै टी एिसड्स (LCFA) से िबलकु ल मुख़्तिलफ होता है। ये िदल क� धमिनयों में कोई कोहराम नहीं मचाते, कॉलेस्टेरोल के स्तर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालते और �दयिहतैषी माने जाते हैं। इनका प्रमुख �ोत ना�रयल ही है। यहाँ यह बात गौर करने लायक है िक एफ.डी.ए. पूरी एक सदी तक सेचुरेटेड फै ट्स (घी, मक्खन, लाडर् और ना�रयल तेल) को �दयरोग, डायिबटीज, आथर्राइिटस तथा अन्य क्रोिनक बीमा�रयों का कारण बताते रहे और प्रोक्टर एंड गैंबल द्वारा बनाए गए िक्रस्को को स्वास्थ्यप्रद और �दय-िहतैषी बताते रहे। जबिक िक्रस्को (जेनेिटकली मोडीफाइड सोयबीन और पाम ऑयल को हाइड्रोजनेट करके बनाया गया सस्ता वनस्पित) ट्रांसफै ट से भरपूर था और पूरी कौम को बीमार कर रहा था। अनुसंधानकतार्ओं और लोगों के भारी दबाव के बाद एफ.डी.ए. ने आिखरकार मान िलया है िक वनस्पित (िक्रस्को) ही इन बीमा�रयों का कारक था और उसे बेन करने के आदेश िदए। इस तरह सेचुरेटेड फै ट्स को क्लीन िचट िमली। ना�रयल तेल के पाचन के िलए कोई एंजाइम या गैिलक एिसड क� ज�रत नहीं होती , बिल्क यह बड़ी सहजता से आमाशय से आंतों में पह�ँचकर अवशोिषत होता है और सीधा लीवर में पह�ँतता है। ये
  3. 3. 3 नन्हें फै ट्स बड़ी आसानी से माइटोकॉिन्ड्रया में प्रवेश कर जाते हैं और ऊजार् बनाते हैं। ना�रयल तेल मेगनीिसयम, कै िल्सयम, बी-िवटािमन्स, फै ट सोल्यूबल िवटािमन्स ( A, D, E और K) और कु छ खास तरह के प्रोटीन्स के अवशोषण में मदद करते हैं। ना�रयल तेल में 91 % सेचुरेटेड फै ट होते हैं और 62% िवशेष मीिडयम चेन फै टी एिसड होते हैं, िजनके नाम नीचे िदए जा रहे हैं।  लॉ�रक एिसड  कै प्रीिलक एिसड  कै िप्रक एिसड लॉ�रक एिसड ना�रयल तेल में सबसे महत्वपूणर् तत्व लॉ�रक एिसड है। ना�रयल तेल के सारे स्वास्थ्यवधर्क, सौंदयर्वधर्क और औषधीय गुणों का कारक यही िडज़ाइनर फै ट है। लॉ�रक एिसड हमारे शरीर में जाकर मोनोलॉ�रन नाम के एक मोनोग्लीसराइड में प�रवितर्त होता है। मोनोलॉ�रन वायरस, बेक्टी�रया, फं गस और अन्य रोगाणुओं के बाहरी तेलीय आवरण को न� करता है और उनको मारने क� �मता रखता है, इस तरह यह तेजी से रोगाणुओं का सफाया कर देता है। प्राकृ ितक िचिकत्सा ने ना�रयल तेल को प्रदाहरोधी माना है। िफिलपीन के सैन लाज़ारो हॉस्पीटल द्वारा ह�ई एड्स स्टडी के अनुसार ना�रयल तेल एच.आई.वी. वायरस को न� करने और एड्स मरीज़ों का सीडी-4 काउंट बढ़ाने का कारक िसद्ध ह�आ। यह इनफ्लुएंजा, हरपीज़ िसंप्लेक्स और एप्स्टन-बार वायरस के उपचार में फायदेमंद माना गया है। मां के दूध में भी लॉ�रक एिसड पाया जाता है, जो िशशु क� इम्युिनटी बढ़ाता है और कई तरह के संक्रमण से बचाता है। ना�रयल तेल के फायदे केश संरक्षक मोनोलॉ�रन के श क� बाहरी परत को भेदकर के श क� आंत�रक परतों और के शकू प को पोषण देता है और डीप कं डीशिनंग करता है। िसर में ना�रयल तेल लगाने से डैंड्रफ खत्म हो जाता है और बाल बढ़ने लगते हैं।
  4. 4. 4 त्वचा संरक्षक ना�रयल तेल के मीिडयम चेन फै टी एिसड्स त्वचा के अंदर पह�ँचकर फ्र�-रेिडकल्स को िनिष्क्रय करते हैं, बाहरी तत्वों तथा सूयर् क� अल्ट्रावॉयलेट िकरणों से प्रोटेक्ट करते हैं, मोइ�राइज़ करते हैं और त्वचा क� कं डीशिनंग करते हैं। ना�रयल तेल में एंटीऑक्सीडेंट तथा प्राकृ ितक एंटीबेक्टी�रयल तत्व कै प्रीिलक और कै िप्रक एिसड होते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ और मुलायम बनाते हैं। इसमें िवटािमन-ई भी होता है जो एक एंटीऑक्सीडेंट है और त्वचा को हील करता है। स्थूलता ना�रयल तेल में िवद्यमान मीिडयम चेन फै टी एिसड्स जल्दी पचते हैं, ऊजार् बनाने में मदद करते हैं और मेटाबोिलज़्म को तीन गुना बढ़ाते हैं। ना�रयल तेल के सेवन से पेट भरा ह�आ महसूस होता है और भूख कम लगती है। इस तरह यह वज़न कम करता है। हाइपोथायरॉयड हाइपोथायरॉयड के रोिगयों में ना�रयल तेल बह�त चमत्कारी माना गया है। इस िवषय पर ह�ए शोध से यह सािबत हो गया है िक ना�रयल तेल मेटाबोिलज़्म को बढ़ाता है, वज़न कम करता है, शरीर का तापक्रम बढ़ाता है, कब्ज़ दूर करता है और एक एंटीऑक्सीडेंट क� तरह काम करता है। हाम�न्स के असंतुलन और इन्फ्लेमेशन के कारण थायरॉयड के रोगी अक्सर मांस-पेिशयों और जोड़ों में ददर् क� िशकायत करते हैं। ना�रयल तेल एक प्राकृ ितक एंटीइंफ्लेमेट्री है और िटश्यूज़ क� मरम्मत करता है और ददर् में आराम देता है। थायरॉयड हाम�न्स क� कमी से त्वचा में �खापन आता है, ना�रयल तेल खोई ह�ई नमी को लौटाता है और त्वचा को स्वस्थ बनाता है। थायरॉयड बालों के �ट्स को नुकसान पह�ँचाता है और �खा और कमजोर बनाता है। लॉ�रक एिसड बालों को स्वस्थ व मजबूत बनाता है और बालों के झड़ने को रोकता है। यहाँ यह भी जान लीिजए िक 93 % अमे�रकन सोयबीन जेनेिटकली मोडीफाइड है और इसमें मौजूद आइसोफ्लेवोन्स, जेनीस्टीन और डायडज़ेन थायरॉयड को �ितगृस्त करते हैं और हाइपोथायरॉयिडज्म का एक बड़ा कारक माने जाते हैं ।
  5. 5. 5 िनमोिनया का �ाकृितक उपचार अमे�रकन कॉलेज ऑफ चेस्ट फ�ज़ीिशयन्स क� शोध (29 अ�ू बर, 2008) के अनुसार ना�रयल तेल िनमोिनया के मरीजों में बह�त लाभदायक पाया गया। डायिबटीज़, �दयरोग और कॉलेस्टेरोल 20-40 वषर् क� ि�यों पर शोध िकया गया। आधी को 30 ml सॉयबीन तेल िदया गया और बाक� आधी को 30 ml ना�रयल तेल िदया गया। दोनों ही समूहों क� ि�यों का बी.एम.आई. कम ह�आ, लेिकन ना�रयल तेल लेने वाली ि�यों के कमर के नाप कम ह�आ और टाइप-2 डॉयिबटीज तथा �दयरोग का जोख़म भी कम ह�आ। यह भी देखा गया िक ना�रयल तेल लेने वाले रोिगयों का एच.डी.एल. कॉलेस्टेराल बढ़ा और एल.डी.एल. कॉलेस्टेराल कम ह�आ। ऑिस्टयोपोरोिसस ना�रयल तेल कै िल्सयम और मेग्नीिसयम के अवशोषण को बढ़ाता है और ऑिस्टयोपोरोिसस के रोगी को फायदा पह�ँचाता है। साथ ही मीिडयम चेन फै टी एिसड्स (MCFAs) ऊजार् पैदा करते हैं, मेटाबोिलज़्म को गित देते हैं और थकावट दूर करते हैं। एल्झाइमसर् रोग डॉ मेरी न्यूपोटर् ने अपने पित को रोज दो टेबलस्पून ना�रयल तेल िपलाकर उनके िडमेंिशया को पूरी तरह ठीक िकया। ना�रयल तेल के अन्य चमत्कारी फायदे  ना�रयल तेल हमें कैं सर, एच.आई.वी. और अन्य संक्रमण रोगों से बचाता है।  यह बेक्टी�रया और टेपवमर् व लीवर फ्लूक समेत कई पेरेसाइट से बचाव करता है।  पेट क� अम्लता को शांत करता है और पाचन िक्रया को सुचा� रखता है।  पाइल्स का इंसीडेंस कम करता है।  आंत के कई रोगों का उपचार करता है।  कान के ददर् में फायदा करता है।
  6. 6. 6  बढ़ी ह�ई प्रोस्टेट के ल�णों में राहत प्रदान करता है।  लीवर को स्वस्थ रखता है।  िमग� के दौरों में फायदा देता है।  जोड़ और मांस-पेिशयों के प्रदाह में राहत देता है।  डायिबटीज जिनत न्यूरोपेथी और खुजली में फायदा करता है। ना�रयल तेल क� औषधीय मा�ा ना�रयल तेल में 50 लॉ�रक एिसड होता है या एक टेबलस्पून तेल से हमे 7 ग्राम लॉ�रक एिसड िमल जाता है। औषधीय फायदे के िलए अनुसंधानकतार्ओंके अनुसार 1-3 टेबलस्पून तेल रोज िलया जाना चािहए। इसे सुबह के दूध या कॉफ� में िमलाकर िलया जा सकता है। आप िदनभर ऊजार्वान बने रहेंगे।

अभी तक हुए 1500 से अधिक शोधों से यह साबित होता है कि नारियल तेल (कोकोस न्युसिफेरा) हमारी धरा पर विद्यमान एक स्वास्थ्यप्रद और उत्कृष्ट तेल है। सेहत से लेकर सुंदरता तक नारियल तेल प्रकृति का नायाब और अनमोल उपहार है। इसके करिश्माई फायदे आपको चौंका देंगे। गर्म करने पर यह खराब नहीं होता। इसकी शैल्फ लाइफ दो वर्ष से अधिक है। हमें अनरिफाइंड, अनहीटेड, ऑर्गेनिक, कॉल्ड-प्रेस्ड और एक्स्ट्रावर्जिन तेल प्रयोग में लेना चाहिए। विश्वविख्यात फैट और ऑयल्स एक्सपर्ट और जर्मनी के फेडरल इंस्टिट्यूट ऑफ फैट्स रिसर्च की चीफ एक्सपर्ट डॉ जॉहाना बडविग ने साबित किया है कि नारियल तेल फ्राइंग और डीप फ्राइंग के लिए सबसे अच्छा विकल्प है। गर्म करने पर इसमें ट्रांसफैट नहीं बनते। कैंसर के रोगी भी इस तेल को प्रयोग कर सकते हैं। पौराणिक महत्व हिंदू धर्म में नारियल एक शुद्ध, सात्विक, पवित्र, फलदायी एवं लक्ष्मी माता से मनुष्य को जोड़ने वाला फल है, इसीलिए इसे संस्कृत में श्रीफल कहते हैं, श्री का अर्थ होता है लक्ष्मी। किसी भी धार्मिक एवं शुभ कार्य में हुई पूजा में नारियल रखने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है। घर में नारियल रखने से घर के वास्तु दोष दूर होते हैं। मंदिरों में आमतौर पर इसे पूजा के दौरान भगवान की मूर्ति के सामने फोड़ा जाता है। फोड़ने के बाद यह नारियल प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है।

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